वैष्णो देवी हाद’से की बड़ी वजह सामने आयी, कैसे बने इस तरह के हालात, जानिए

नए साल की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के कटड़ा स्थित वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno devi stampede) में हुए हाद’से ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। इस हादसे में देश के अलग अलग राज्यों के कई परिवारों में अपनों को खो दिया है। आपको बता दें इस हादसे की वजह वहां पर एकत्रित हुई भारी भी’ड़ को बताया जा रहा है।

हलाकि हर साल ही नव वर्ष के मौके पर लोग वैष्‍णो माता के दर्शन करने आते है। लेकिन इस बार बताया जा रहा है की वहां पर जाने वालों की संख्‍या काफी थी। जिसके चलते यह हाद’सा हुआ है। वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच हुई भगद’ड़ में 13 लोगों की जा’न चली गई है।

वही इस हाद’से में 20 से ज्यादा लोग घाय’ल बताए जा रहे जिन्हे अस्पताल में भ’र्ती काय्र्य गया हैं। हलाकि इस घट’ना के बाद प्रशासन सभी हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन श्रद्धालुओं की ओर से पूछा जा रहा है, जिनके परिवार के लोगों ने इस हाद’से में अपनी जा’न गवाई हैं।

‘गुस्साए लोगों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया’

आपको बता दें इस हाद’से में एक मासूम बच्ची और दो महिलाओं समेत कुल 13 लोगों की जा’न जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल ये है कि उत्तर भारत के सबसे सिक्योर मंदिर के रूप में मशहूर वैष्णो देवी में इतना बड़ा हाद’सा हुआ कैसे। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर चेकपोस्ट के गेट्स बंद क्यों नहीं किए गए। जबकि मंदिर में क्राउड कंट्रोल से लेकर हाई सिक्योरिटी तक की व्यवस्था है।

आपको बता दें मंदिर में दर्शन करने के लिए हर एक यात्रा रजिस्ट्रेशन होता है, जिसकी पर्ची ऑनलाइन भी मिलती है और ऑफलाइन भी। और सबसे बड़ी बात कि इस पर्ची की एक सीमित संख्या होती है, जिससे कि मंदिर परिसर में क्राउड को कंट्रोल किया जा सके। आपको बता दें ये कोटा फिलहाल 25 हजार का है, जिसकी 20 फीसदी संख्या ऑनलाइन यात्रा पर्चियों के रूप में अलॉट होती है।

‘जब भी’ड़ बढ़ती है तो पर्ची जारी करना बंद हो जाता है’

हलाकि आम तौर पर तय कोटे के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ने पर चेकपोस्ट के गेट बंद कर दिए जाते है। जिससे कि मुख्य भवन के अंदर ज्यादा भी’ड़ इकट्ठी ना हो। लेकिन इस बार इस बात का ध्यान नहीं रखा गया।

और इसके अलावा मंदिर के मुख्य भवन पर लाइन लगाने के लिए भी अलग से सुरक्षा व्यवस्था की जाती है लेकिन उसका भी ख्याल नहीं रखा गया। मंदिर परिसर में कई गेट हैं, जहां से भी’ड़ की स्थितियों में श्रद्धालुओं को मंदिर में घुसने की व्यवस्था दी जाती है।

इसके अलावा कटड़ा, बाणगंगा, हिमकोटी और मुख्य भवन पर चेक पोस्ट्स भी हैं। सभी से पर्चियों को चेक करने के बाद लोगों को अंदर की और जाने दिया जाता है। लेकिन इस बार इसे भी इग्नोर किया गया।

‘न्यू ईयर के कारण और भी’ड़ बढ़ गई’

गौरतलब है की वीकेंड होने के कारण दिल्ली व हरियाणा के श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या यहां पहुँचती है। कटड़ा बस स्टैंड से लेकर बाणगंगा की चेकपोस्ट तक भारी भी’ड़ होती है, लेकिन नीचे से ही भी’ड़ को रोकने का कोई इंतजाम नहीं हुआ। आपको बता दें करीब 12 किलोमीटर की यात्रा के बाद श्रद्धालु मंदिर पहुंचते है।

सूत्रों का कहना है कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त मंदिर भवन पर 50 हजार से अधिक की भी’ड़ थी और कोटा मात्र 25 हजार का ही था। लेकिन सारी व्यवस्थाएं इग्नोर कर लोगों को नहीं रोका गया और भी’ड़ में एक बड़ा हाद’सा हो गया।

वही अमर उजाला की खबर के अनुसार वैष्णो देवी में हुए हाद’से के बाद लोगों ने भवन के बाहर और कटड़ा में प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि श्राइन बोर्ड की तरफ से सारे इंतजाम होने के बाबजूद यात्रियों के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। वहां पर बड़ी संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन करवाए लोगों को भवन की ओर जाने दिया गया।

जिस कारण वहां भी’ड़ इकट्ठा होती गई। और यह हाद’सा हो गया। आ’क्रोशि’त लोगों ने यह भी आरोप लगाए कि मौके पर तैनात पुलिसकर्मी अलग से पैसे लेकर लोगों को जल्द दर्शन करवाने के लिए आगे भेज रहे थे। जिससे भी’ड़ अनियंत्रित हो गई। और इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ पुलिसकर्मियों ने ला”ठीचा’र्ज कर दिया।

जिसके कारण स्थिति बिगड़ती चली गई। और इतना बड़ा हाद’सा हो गया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा की ला’ठीचा’र्ज होते ही लोग इधर उधर भागने लगे। धक्का-मुक्की होने लगी और इस धक्का-मुक्की के कारण से कुछ लोग गिर गए। और पीछे से आ रही भी’ड़ उन्हें रौं’दते हुए आगे बढ़ गई। जमीन पर गिरे लोगों की द’म घु’टने से मौ-त हो गई।

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