किसानों को खालिस्तानी और आतंकवादी कहने वाले मोदी के मंत्री और सांसद अब क्या कह रहे हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। ये सरकार द्वारा लिया गया अब तक का सबसे बड़ा यू-टर्न है। अब दिलचस्प ये है कि सरकार के साथ-साथ सरकार में शामिल मंत्रियों, नेताओं और समर्थकों ने भी यू-टर्न लेना शुरू कर दिया है।

भाजपा सांसद सुशील मोदी ने किसान आन्दोलन को ‘शाहीनबाग मॉडल’ पर चलने वाला आन्दोलन बताया था। दरअसल सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट के दौरान ही भाजपा ने शाहीनबाग आन्दोलन का दुष्प्रचारत कर दिया था। फिर किसान आन्दोलन को शाहीनबाग से जोड़कर उसे संदिग्ध बताने की कोशिश की गई थी।

सुशील मोदी ने लिखा था, ”दिल्ली के ताजा किसान आन्दोलन में जिस तरह के नारे और जिस तरह इसे शाहीनबाग मॉडल पर चलाया जा रहा है, उससे साफ है कि किसानों के बीच टुकड़े-टुकड़े गैंग और सीएए विरोधी ताकतों ने हाईजैक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी”

फिलहाल सुशील मोदी के सुर बदल गये हैं। अब सुशील मोदी को अचानक ही किसान ‘अन्नदाता’ नज़र आने लगे हैं। कभी कृषि कानूनों को किसानों के लिए सबसे अधिक लाभकारी बताने वाले सुशील मोदी, अब कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के फैसले को ”अन्नदाता का दिल जितने वाला फैसला” बता रहे हैं।

केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने तो किसान आन्दोलन में शामिल किसानों को किसान मानने से ही इंकार कर दिया था। उनके लिए किसान आन्दोलन ‘तथाकथित किसान आन्दोलन’ था, जिसमें माओवादी भी शामिल थे।

पीयूष गोयल ने लिखा था, ”अब हम महसूस करते हैं कि तथाकथित किसान आंदोलन शायद ही किसानों का आन्दोलन रह गया है। इसमें वामपंथी और माओवादी तत्वों का घुसपैठ हो चुका है”

लेकिन अब पीयूष गोयल कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के फैसले को स्वागत योग्य कदम बता रहे हैं। उन्होंने लिखा, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा कृषि कानूनों को लेकर की गयी घोषणा स्वागत योग्य कदम है। ‘गुरु पूरब’ के पवित्र दिन की गयी यह घोषणा दर्शाती है कि सरकार किसानों के कल्याण के लिये प्रतिबद्ध है। इस निर्णय से समाज में आपसी सौहार्द का वातावरण और मजबूत होगा।”

लगभग यही हाल पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और भाजपा सांसद मनोज तिवारी का है। पहले इन लोगों ने किसान आन्दोलन को टुकरे-टुकरे गैंग और देश विरोधी आदि बताया और अब प्रधानमंत्री मोदी के घोषणा को ट्विटर पर पिन करके चमका रहे हैं। कुल मिलाकर बात ये है कि इनका अपना कोई स्टैंड नहीं है।

ये सब देखकर सफ़र फिल्म के उस गाने की याद आती है, जिसके बोल हैं- जो तुमको हो पसन्द वही बात कहेंगे। तुम दिन को अगर, रात कहो, रात कहेंगे।

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