धड़ाधड़ गिर रहे इस्तीफे थम नहीं रहा घमासान, ‘एक को मनाओ तो दूजा रूठ जाता’ वाला है हाल

पंजाब में कांग्रेस का अंदरूनी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। धड़ाधड़ इस्तीफे गिर रहे हैं। एक को मनाओ तो दूजा रूठ जाता वाला गाना फिलहाल यहां कांग्रेस (Congress) पर सटीक बैठ रहा है। मंगलवार को पहले पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) ने अपने पद से इस्तीफा दिया। उसके बाद से राजनीतिक घटनाक्रम काफी तेज हो गया।

बात इस्तीफों से होते हुए फ्लोर टेस्ट (Floor test) तक पहुंचने लगी है। वहीं दो गुटों में विधायकों की गोलबंदी की खबरें भी बाहर आने लगीं हैं। हालांकि, इस्तीफों को छोड़ किसी भी घटना की कहीं से अधिकृत तौर पर कोई पुष्टि नहीं हो रही है लेकिन कहा गया है कि बिना आग के धुंआ भी तो नहीं उठता।

नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद अब तक पंजाब कांग्रेस के कई नेता इस्तीफा दे चुके हैं। उनमें कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना (Rajiya Sultana) का नाम प्रमुख है, जो कुल जमा दो दिन पहले ही कैबिनेट का हिस्सा बनीं थीं। वहीं, उनके साथ-साथ मोहम्मद मुस्तफा, सुखविंदर सिंह डैनी और कुलजीत सिंह नागर का नाम प्रमुख हैं।

बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात इन सभी नेताओं की पटियाला स्थित नवजोत सिंह सिद्धू के आवास पर बैठक हुई है। सूत्रों का कहना है कि पंजाब के मंत्री परगट सिंह (Parvat Singh) और कांग्रेस विधायक कुलबीर सिंह जीरा भी सिद्धू के पटियाला स्थित आवास पर हुई बैठक में शामिल हुए हैं। बता दें कि सिद्धू के इस्तीफे के बाद पंजाब कांग्रेस का घमासान एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। इस्तीफा देकर कांग्रेस पार्टी को तगड़ा झटका देने वाले सिद्धू पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि अगर उन्हें फैसला लेने से रोका गया तो वह ईंट से ईंट बजा देंगे। सिद्धू के इस्तीफे के बाद ऐसा लगने भी लगा है।

मंगलवार को पंजाब कांग्रेस में एक सिद्धू का ही इस्तीफा नहीं आया, बल्कि उनके सात तीन और नेताओं ने इस्तीफे दे दिया। सिद्धू के इस्तीफे के कुछ ही घंटे बाद चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) के नेतृत्व में 18 सदस्यीय नए मंत्रिमंडल में शामिल रजिया सुल्ताना ने भी पूर्व क्रिकेटर के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए अपना इस्तीफा दे दिया। उधर, नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद, सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने बुधवार सुबह 10:30 बजे अपने मंत्रिमंडल की बैठक (Cabinet Meeting) बुलाई है। कैबिनेट का एजेंडा को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं है।

वहीं, इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बाताया है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस विधायकों ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री से राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने का आग्रह किया है। Also Read – Political News : नई पार्टी बनाएंगे कैप्टन अमरिंदर सिंह, दिल्ली पहुंचे – मिल सकते हैं जेपी नड्डा से पंजाब के भोलाथ से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने मंगलवार को कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू ने “पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक स्टैंड लिया था”।

खैरा ने कहा, “अगर उनके सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वह अवाक अध्यक्ष नहीं हो सकते। हम उनसे अपना इस्तीफा वापस लेने का आग्रह करते हैं और आलाकमान से उनकी शिकायतों के निवारण का अनुरोध करते हैं।” बता दें कि में नयी मंत्रिपरिषद के सदस्यों को विभागों के आवंटन के तुरंत बाद सिद्धू (57) ने पद छोड़ दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में सिद्धू ने कहा है कि वह पार्टी की सेवा करना जारी रखेंगे। सिद्धू ने यह नहीं बताया कि उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया। लेकिन पार्टी हलकों में इसकी वजह नये मुख्यमंत्री द्वारा उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) को गृह विभाग आवंटित किए जाने, नए कार्यवाहक पुलिस प्रमुख और राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति पर उनकी नाराजगी को लेकर अटकलें हैं।

बता दें कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के नाम पत्र लिखकर इस्तीफा दिया। सिद्धू ने पत्र में लिखा कि किसी के चरित्र के पतन की शुरुआत समझौते से होती है। मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब के कल्याण के एजेंडे से कभी समझौता नहीं कर सकता। इसलिए मैं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। हालाांकि सिद्धू ने यह भी कहा कि वह कांग्रेस (Congres) की सेवा करते रहेंगे।

सिद्धू के इस्तीफे की कई वजहें मानी जा रहीं हैं। कि पंजाब में मंत्रियों के नाम तय किए गए तब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ बातचीत कर इसका फैसला लिया। इस बातचीत में नवजोत सिंह सिद्धू को शामिल नहीं किया गया। पहले दिन की मीटिंग में उन्हें बुलाया जरूर गया लेकिन जब राहुल गांधी शिमला से लौटकर आए तब की मीटिंग में सिद्धू को शामिल नहीं किया गया। दूसरी वजह यह भी मानी जा रही है कि सीएम चन्नी ने जिन भी लोगों के नाम तय करने शुरु किए चाहे वो डीजीपी हों या एडवोकेट जनरल हों, इसमें भी सिद्धू की नहीं मानी गई।

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